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*श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वीर बाल दिवस का आयोजन*




सिकन्दरपुर, बलिया - श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. उदय पासवान के मार्गदर्शन और संरक्षण में आयोजित हुआ। इस आयोजन में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस.एन. मिश्र के नेतृत्व ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय केप्राध्यापक डॉ. उमाकांत यादव और बड़े बाबू श्री हरेंद्र नाथ चौधरी ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाओं ने वीर बाल दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके भाषणों में समाज के प्रति जागरूकता और देशभक्ति की भावना को प्रकट किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास के महान बलिदानों और देश के प्रति निष्ठा की भावना से प्रेरित करना था। पूरे आयोजन में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई और वीर बाल दिवस के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी डॉ एस एन मिश्र ने सभी को संबोधित करते हुए वीर बाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और युवाओं को प्रेरणादायक संदेश देते हुये कहा कि वीर बाल दिवस हर वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन सिख धर्म के महान बलिदानों की याद में मनाया जाता है, विशेष रूप से गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्रों के बलिदान को समर्पित है। उनके चार साहिबजादों ने धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे पुत्र, साहिबजादा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और साहिबजादा फतेह सिंह (6 वर्ष), को मुगलों ने जीवित दीवार में चुनवा दिया था क्योंकि उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनके बलिदान ने सिख धर्म और मानवता के इतिहास में साहस और निष्ठा की अमिट छाप छोड़ी। गुरु गोबिंद सिंह जी के दो बड़े पुत्र, साहिबजादा अजीत सिंह (18 वर्ष) और साहिबजादा जुझार सिंह (14 वर्ष), ने चमकौर की लड़ाई में वीरता से युद्ध करते हुए अपने प्राण त्याग दिए। वीर बाल दिवस का कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को "वीर बाल दिवस" के रूप में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को साहिबजादों के अदम्य साहस, बलिदान और धर्मनिष्ठा से प्रेरणा देना है। यह दिन हमें धर्म, सत्य और न्याय के लिए समर्पण की शिक्षा देता है। वीर बाल दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों और युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने और साहस एवं सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने का अवसर है। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपने मूल्यों और आदर्शों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। वीर बाल दिवस हमारे इतिहास के गौरवशाली पन्नों को याद करने और उनसे प्रेरणा लेने का प्रतीक है।

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