सिकंदरपुर (बलिया)।
न्यायालय के आदेश पर हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद हथौज गांव की रफ्तार जैसे थम गई है। कार्रवाई के बाद से गांव में असहज शांति है—गलियां सूनी हैं, दुकानों पर चहल-पहल नहीं और लोग जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीणों में डर और अनिश्चितता साफ महसूस की जा रही है।
कार्रवाई के वक्त भारी पुलिस बल की मौजूदगी और सख्त प्रशासनिक तेवरों ने लोगों के मन में भय बैठा दिया है। कई परिवारों के सामने आजीविका और आशियाने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। महिलाओं और बुजुर्गों में चिंता अधिक दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण हटने के बाद उन्हें आगे की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे अफवाहें फैल रही हैं और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप और नियमों के तहत की गई है।
प्रशासन ने गांव में शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें। हालांकि, हथौज में फिलहाल खामोशी के पीछे छुपा डर अब भी बना हुआ है।
