दिल्ली।
उत्तर प्रदेश के अपर प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा छह से आठ) में कार्यरत अनुदेशक शिक्षकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। यह आदेश शैक्षणिक सत्र 2017-18 से प्रभावी माना जाएगा।
अदालत ने कहा कि मानदेय का भुगतान नियमित रूप से किया जाए और इसके साथ ही पिछले छह माह का बकाया भी निर्धारित अवधि में चुकाया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मानदेय स्थिर नहीं रह सकता और हर तीन वर्ष में इसका पुनरीक्षण आवश्यक होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया है कि अनुदेशकों का अनुबंध काल समाप्त होने के बाद उनकी सेवाओं के नियमितीकरण पर निर्णय लिया जाए। लंबे समय तक एक ही प्रकृति का कार्य लेने के बावजूद उन्हें अस्थायी बनाए रखना न्यायसंगत नहीं है।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
अपर प्राथमिक विद्यालयों में वर्ष 2013-14 में पार्ट-टाइम अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी। उस समय उन्हें 7,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था। बाद में मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर अनुदेशक संगठनों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका केंद्रीय है और उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक व सेवा-सुरक्षा मिलनी चाहिए। यह आदेश उत्तर प्रदेश अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर पारित किया गया है।
