पूरे यूपी में जांच के आदेश, सैलरी रिकवरी और अफसरों पर भी कार्रवाई
प्रयागराज।
फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने वाले असिस्टेंट टीचरों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि पूरे राज्य में ऐसे सभी मामलों की व्यापक जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि यह जांच यथासंभव छह महीने के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अवैध नियुक्तियां रद्द करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले शिक्षकों से अब तक प्राप्त वेतन की रिकवरी भी अनिवार्य रूप से की जाए।
इसके साथ ही कोर्ट ने फर्जी नियुक्तियों में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय व कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में कई सर्कुलर और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों की यह निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को भी कमजोर करती है। इसका सीधा नुकसान छात्रों के हितों को होता है, जिन्हें संरक्षण देना न्यायालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
