तहसील सिकंदरपुर अंतर्गत किला कोहना, चक फतेउल्लाह, चक मुबारक, दुगौली, मखदुमपुर, चक चतुर्मुख, रहिलापाली खरगसी, रहिलापाली घरवास एवं बढ़्ढा माफी गांवों में स्थित नॉन-Z ए (Non-Za) जमीनों का पूरा ब्यौरा अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है। इसके आधार पर संबंधित जमीनों की डिजिटल खतौनी तैयार की जा रही है।
यह कार्य राजस्व परिषद के निर्देश पर किया जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी उप जिलाधिकारी (एसडीएम) एवं तहसीलदार को सौंपी गई है।
डिजिटलीकरण का मुख्य उद्देश्य गुमनाम भूखंडों के रिकॉर्ड को सुरक्षित करना, भूमि विवादों में कमी लाना और प्रशासनिक कार्यों को सुगम बनाना है।
बताया गया कि Non-Za जमीनें वे भूमि होती हैं, जो किसी विशेष ज़ोन जैसे कृषि या आवासीय श्रेणी में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होतीं और पारंपरिक राजस्व अभिलेखों में इनका विवरण आसानी से उपलब्ध नहीं रहता। इसी कारण इन जमीनों का डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
इस नई तकनीक के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड सेवाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी सुविधा मिलेगी। अन्य राज्यों, जैसे उत्तराखंड, में भी खतौनी व अन्य राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की पहल की जा चुकी है, जिससे लोग बिना तहसील गए खसरा-खतौनी प्राप्त कर सकेंगे।
तहसील सिकंदरपुर में पहले से मौजूद Non-Za जमीनों के डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से जारी है। अधिकारियों के अनुसार, इससे भविष्य में भू-लेख संबंधी विवादों में कमी आएगी और भूमि रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी व सुलभ होंगे।
देशभर में भी डिजिटल इंडिया अभियान के तहत भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नागरिकों को घर बैठे खतौनी और खसरा की सुविधा मिल सके।
