पुराने राजस्व नक्शों से बेनकाब हुआ खेल, अफसरों की टीम मौके पर—भू-माफिया में मचा हड़कंप
बलिया।
जिस ज़मीन को वर्षों से चौक और कचहरी बताकर आमजन को गुमराह किया जा रहा था, वह वास्तव में सरकारी भूमि निकली। पुराने राजस्व अभिलेखों और नक्शों की जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है। खुलासे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर सत्यापन में जुट गई है।
जांच के साथ ही कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—
सरकारी ज़मीन का मालिक आखिर बना कौन?
राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने की अनुमति किसके आदेश से दी गई?
फाइलों में हुई हेराफेरी के पीछे कौन-कौन शामिल है?
सूत्रों के मुताबिक काग़ज़ों में छेड़छाड़, फर्जी प्रविष्टियों और अफसर-दलाल-भू-माफिया की कथित सांठगांठ के जरिए “दूसरी बलिया” नाम से एक पूरा इलाका खड़ा कर दिया गया। आरोप है कि वर्षों तक प्रशासनिक अनदेखी के चलते सरकारी ज़मीन को निजी कमाई का साधन बनाया गया।
जांच शुरू होते ही ज़मीन कारोबारियों, अवैध कब्ज़ाधारियों और संरक्षण देने वालों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि—
सभी संदिग्ध नाम सार्वजनिक किए जाएंगे,
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होगी,
और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
अब जनता सवाल पूछ रही है—
इतने वर्षों तक यह खेल कैसे चलता रहा?
जिम्मेदारी किसकी है?
और क्या इस बार बड़े चेहरे भी जांच के दायरे में आएंगे?
