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उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के लिए यूजीसी के नए समता विनियम-2026 लागू

 


नई दिल्ली।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, समावेशन और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026” लागू कर दिए हैं। ये विनियम राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होंगे और भारत के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों पर लागू होंगे।

यूजीसी के अनुसार, इन नियमों का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान, दिव्यांगता अथवा सामाजिक-आर्थिक आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का उन्मूलन करना है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, दिव्यांगजन एवं महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे।

हर संस्थान में बनेगा समान अवसर केंद्र

नए विनियमों के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में “समान अवसर केंद्र” की स्थापना अनिवार्य होगी। यह केंद्र वंचित वर्गों से जुड़े छात्रों और कर्मचारियों को शैक्षणिक, सामाजिक और वित्तीय मामलों में मार्गदर्शन देगा तथा भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की निगरानी करेगा।

कम संसाधन वाले महाविद्यालयों के लिए यह जिम्मेदारी संबद्ध विश्वविद्यालय के समान अवसर केंद्र द्वारा निभाई जाएगी।

समता समिति और समता समूह का गठन

हर संस्थान में एक समता समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता संस्थान प्रमुख करेंगे। समिति में संकाय सदस्य, कर्मचारी, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इसके साथ ही परिसर में निगरानी के लिए “समता समूह (इक्विटी स्क्वॉड)” और प्रत्येक इकाई में “समता दूत (इक्विटी एंबेसडर)” भी नामित किए जाएंगे।

24 घंटे सक्रिय रहेगी समता हेल्पलाइन

विनियमों के अनुसार, प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में 24×7 समता हेल्पलाइन स्थापित करना अनिवार्य होगा। किसी भी भेदभाव की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। गंभीर मामलों में पुलिस को भी सूचित किया जाएगा।

शिकायत निवारण की समयबद्ध प्रक्रिया

भेदभाव से संबंधित शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर समता समिति की बैठक,

15 कार्यदिवस में जांच रिपोर्ट,

और 7 कार्यदिवस में कार्रवाई अनिवार्य की गई है।

समिति के निर्णय से असंतुष्ट व्यक्ति लोकपाल के समक्ष 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है।

वार्षिक रिपोर्ट और निगरानी

हर संस्थान को समान अवसर केंद्र की वार्षिक रिपोर्ट यूजीसी और संबंधित प्राधिकरणों को सौंपनी होगी। यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी समिति के माध्यम से इन नियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा।

नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई

यदि कोई संस्थान इन विनियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी द्वारा

यूजीसी योजनाओं से वंचित करना

डिग्री/कार्यक्रम संचालन पर रोक

ओडीएल और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों पर प्रतिबंध

यूजीसी की मान्यता सूची से नाम हटाना

जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।

शिक्षा परिसरों में समता की दिशा में बड़ा कदम

यूजीसी का मानना है कि ये विनियम उच्च शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित, समावेशी और समान अवसरों वाला वातावरण प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएंगे और सामाजिक न्याय को मजबूती देंगे।

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