सिकन्दरपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गर्मी की शुरुआत के साथ ही बुनियादी सुविधाओं की पोल खुल गई है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
अस्पताल में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए लगाई गई लाखों रुपये की आरओ मशीन पिछले लगभग एक वर्ष से खराब पड़ी है, जबकि पानी की टंकी भी कई वर्षों से अनुपयोगी स्थिति में है। चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर समस्या पर अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं गया है।
स्थिति इतनी खराब है कि अस्पताल परिसर में न तो हैंडपंप की सुविधा उपलब्ध है और न ही कोई वैकल्पिक जल व्यवस्था। दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब और मजदूर वर्ग के लोग किसी तरह इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन यहां उन्हें पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के सामने यह मुश्किल खड़ी हो जाती है कि वे इलाज कराएं या बोतलबंद पानी खरीदें।
मरीजों का कहना है कि जहां अस्पताल से राहत की उम्मीद रहती है, वहीं पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए जूझना पड़ रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज यहां पहुंचते हैं, लेकिन पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जो स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है।
स्थानीय लोगों ने इस बदहाल स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए जल्द से जल्द पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
