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जर्जर प्राथमिक विद्यालय बना बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा, ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से ध्वस्तीकरण व पुनर्निर्माण की रखी मांग

 



बलिया जनपद के पंदह शिक्षा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बरवा ग्राम पंचायत का एक प्राथमिक विद्यालय इन दिनों अपनी जर्जर हालत के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। यह विद्यालय लंबे समय से शिक्षण कार्य के लिए उपयोग में नहीं है, लेकिन इसकी जीर्ण-शीर्ण इमारत अब बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस विद्यालय में फिलहाल कोई छात्र पढ़ाई नहीं करता, क्योंकि पास के ही एक अन्य प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई चल रही है। इसके बावजूद, बच्चे खेलकूद के दौरान इस पुराने विद्यालय के आंगन और बरामदे में पहुंच जाते हैं। विद्यालय की दीवारें जगह-जगह से टूटी हुई हैं, छत पर दरारें पड़ चुकी हैं और कई जगह प्लास्टर झड़ चुका है। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।



बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

बरवा गांव के रहने वाले अभिभावकों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। पुरानी छत से पानी टपकने के साथ-साथ दीवारों में नमी भर जाती है, जिससे इनके गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गांव के एक बुजुर्ग ने बताया, "बच्चे पास के विद्यालय से छुट्टी होने के बाद यहां खेलने आ जाते हैं। हमें हमेशा डर रहता है कि कहीं दीवार या छत गिरने से कोई अनहोनी न हो जाए।"

ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार इस भवन के पास खेल रहे बच्चों को वहां से हटाना पड़ा है। हालांकि, बच्चों की जिज्ञासा और खेलने की आदत के कारण वे बार-बार यहां चले आते हैं।

जिलाधिकारी को सौंपा पत्रक

गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से बलिया जिलाधिकारी को एक पत्रक सौंपा है, जिसमें इस जर्जर विद्यालय का ध्वस्तीकरण कर उसके स्थान पर नया भवन निर्माण कराने की मांग की गई है। पत्रक में साफ लिखा गया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


सरकार की योजनाओं पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। एक ओर करोड़ों रुपये की लागत से नए विद्यालय भवन बनवाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई पुराने विद्यालय खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और प्रशासन की नज़र तक उन पर नहीं पड़ती।

बरवा गांव के लोगों का कहना है कि यह भवन न केवल बेकार पड़ा है बल्कि खतरे का सबब बन चुका है। यदि प्रशासन समय रहते इसे गिराकर पुनर्निर्माण नहीं करता, तो भविष्य में यहां फिर से शिक्षा व्यवस्था शुरू करना मुश्किल हो जाएगा।

शिक्षा विभाग की चुप्पी

इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कई बार इस भवन का निरीक्षण करने आए, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कुछ अधिकारियों ने केवल रिपोर्ट तैयार कर कागजों में फाइल बंद कर दी, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है।

बच्चों के भविष्य का सवाल

गांव के युवाओं का मानना है कि यदि इस भवन का पुनर्निर्माण कर इसमें पढ़ाई शुरू कराई जाए, तो गांव के बच्चों को और बेहतर शैक्षिक माहौल मिलेगा। पास के विद्यालय में वर्तमान समय में छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण कक्षाओं में भीड़ रहती है। ऐसे में, इस भवन को दुरुस्त कर पुनः पढ़ाई शुरू करना शिक्षा व्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होगा।

ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में प्रशासन इस मामले में कोई कदम नहीं उठाता, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी। गांव के युवाओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है, ताकि यह आवाज़ बड़े स्तर तक पहुंचे और जल्द समाधान हो सके।

निष्कर्ष

बरवा ग्राम पंचायत का यह मामला सिर्फ एक जर्जर विद्यालय भवन का नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा, ग्रामीणों की चिंता और शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आईना भी है। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं और कब तक इस भवन का ध्वस्तीकरण व पुनर्निर्माण संभव हो पाता है।

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