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स्व. बाबू राजू राम : शिक्षा और समाज सेवा को जीवनभर समर्पित व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि

 



सिकंदरपुर (बलिया) — तहसील क्षेत्र के संदवापुर गांव के वह व्यक्तित्व, जिनका जीवन समाज सेवा, शिक्षा और जनकल्याण को समर्पित रहा, अब हमारे बीच नहीं हैं। पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि स्वर्गीय बाबू राजू राम का 31 जुलाई 2025 को निधन हो गया। उनकी स्मृति में आज 10 अगस्त को उनके पैतृक आवास संदवापुर में शांति पाठ और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रवासी, शुभचिंतक और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता उन्हें अंतिम विदाई देंगे।


संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल


1 जनवरी 1947 को संदवापुर गांव में जन्मे बाबू राजू राम का जीवन संघर्षों से भरा रहा। मात्र तीन वर्ष की आयु में ही उनके पिता स्वर्गीय बाबू सूचित राम का निधन हो गया। कठिन परिस्थितियों में उनकी मां, स्वर्गीय मूर्ति देवी ने उनका पालन-पोषण किया। प्राथमिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद, उनके बड़े भाई स्वर्गीय बाबू तेजू राम (बीएचएल रांची में कार्यरत) उन्हें रांची ले गए, जहां से उन्होंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता में कोल माइंस में नौकरी की और 2006 में सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक गांव लौट आए। शिक्षा को जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता मानने वाले बाबू राजू राम ने हर दौर में समाज को प्रेरित किया।




शिक्षा और समाज सेवा के प्रति समर्पण


सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका ध्येय समाज सेवा ही रहा। उन्होंने अपने क्षेत्र के 100 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने में सहयोग किया और दर्जनों युवाओं को बेंगलुरु में रोजगार उपलब्ध कराया। बलिया जनपद के 12 गरीब बच्चों की शिक्षा का खर्च उन्होंने बचपन से उठाया और उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने में मदद की। गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाना उनका जीवन मिशन था।


राजनीतिक जीवन और विकास कार्य


वर्ष 1980 से ही वे बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के विचारों से जुड़े रहे। कोलकाता में नौकरी के दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र के 100 से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने में मदद की। 2006 में रिटायर होकर गांव लौटने के बाद 2010 से 2012 तक पंदह विकासखंड के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने सड़क, पुलिया, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के कई कार्य कराए। उनका मानना था— “विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।”


परिवार के प्रेरणास्रोत


अपने पीछे वे चार पुत्र और चार बेटियां छोड़ गए हैं। सबसे बड़े पुत्र डॉ. जयप्रकाश राम IIBS के चेयरमैन हैं, द्वितीय पुत्र डॉ. चन्द्रशेखर हैं, तीसरे पुत्र चन्द्रभान इंडियन बैंक में ब्रांच मैनेजर हैं और चौथे पुत्र सूर्यभान हैं। डॉ. जयप्रकाश राम ने कहा—

“पिताजी हमेशा कहते थे कि पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यापार ही जीवन को संवार सकता है। वे हर काम के लिए हमें प्रेरित करते और विश्वास दिलाते—‘तुम यह कर लोगे’। यही विश्वास आज हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”


अधूरा सपना, पूरा करने का संकल्प


बाबू राजू राम का सपना था कि गांव में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो, ताकि ग्रामीण बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों में न जाना पड़े। वे चाहते थे कि एक ऐसा विद्यालय बने जो बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र हो। जीवन के अंतिम दिनों में वे बार-बार कहते—

“अगर हमारे गांव में एक अच्छा विद्यालय हो जाए तो हमारे बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर और अफसर बन सकेंगे।”


उनकी यह इच्छा अब उनके परिवार का संकल्प बन गई है। डॉ. जयप्रकाश राम ने कहा—

“पिताजी का सपना केवल उनका निजी सपना नहीं था, बल्कि पूरे क्षेत्र का सपना था। इसे पूरा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। बहुत जल्द हम इस विद्यालय की स्थापना करेंगे।”


श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसैलाब


आज आयोजित श्रद्धांजलि सभा में परिजन, मित्र, सहयोगी, राजनीतिक कार्यकर्ता और ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। सभी ने उनके प्रेरणादायक जीवन प्रसंगों को साझा किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।


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