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"सरयू में उफान, सिकंदरपुर के गांवों में घुसा पानी; फसलें डूबीं, किसानों की चिंता बढ़ी"




 सिकंदरपुर (बलिया)।

सरयू (घाघरा) नदी में जलस्तर लगातार बढ़ने से जनपद के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। बीते 24 घंटों में जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण ग्राम पीलूई, बहदुरा, निपानिया और खरीद के खेतों में पानी भर गया है। कई स्थानों पर धान और अन्य खरीफ फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी की यही रफ्तार रही तो जल्द ही घरों तक पानी पहुंच सकता है।


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर सुनील कुमार ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ आपदा कंट्रोल प्रभारी एवं उपजिलाधिकारी न्यायिक पुष्कर मिश्रा, खंड विकास अधिकारी मनियर शत्रुघ्न कुमार, राजस्व निरीक्षक राजेश कुमार, लेखपाल विवेक, रमेश यादव, संजय कुमार और प्रभावित ग्रामों के प्रधान भी मौजूद रहे। टीम ने खेतों, गांवों और तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया तथा स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।


प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों और शरणालयों को सक्रिय कर दिया है। बाढ़ चौकियों पर स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की विशेष टीमें तैनात की जा रही हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य आरंभ किया जा सके। पंचायत सचिव और लेखपालों की निगरानी में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, जिससे कटान या जलभराव से घिरे गांवों में आवाजाही सुचारू रहे।


उपजिलाधिकारी सुनील कुमार ने सभी लेखपालों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में रहकर 24 घंटे हालात पर नजर रखें। किसी भी बदलाव या आपात स्थिति की सूचना तत्काल बाढ़ नियंत्रण कक्ष को दी जाए। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं, पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।


स्थानीय किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी फसलों को बचाने की है। कई खेतों में धान की बाली पूरी तरह पानी में डूब चुकी है, जबकि अन्य खेतों में कटाई योग्य फसलें सड़ने लगी हैं। किसान ट्यूबवेल और पंप सेट के जरिए पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तेज बहाव और लगातार बारिश के कारण यह प्रयास सीमित प्रभाव डाल पा रहा है।


बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट में अभी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन ने राहत सामग्री, दवाएं और पशुचारे का पर्याप्त भंडारण कर लिया है, ताकि संकट की घड़ी में किसी भी जरूरतमंद को दिक्कत न हो।


ग्राम प्रधानों और स्वयंसेवी संगठनों की मदद से राहत शिविरों में साफ पानी, भोजन, दवाएं और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में प्रभावित परिवारों को सहायता से वंचित नहीं रखा जाएगा।


फिलहाल, ग्रामीणों की निगाहें आसमान और नदी दोनों पर टिकी हैं। एक ओर वे बारिश थमने की प्रार्थना कर रहे हैं, वहीं प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि जलस्तर में तेजी से वृद्धि न हो, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

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