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सरयू नदी के तटवर्ती गांवों को राहत: कटान पर अंकुश, सरकारी प्रयास हुए असरदार

 


सिकंदरपुर (बलिया)।

इस वर्ष सरयू (घाघरा) नदी के किनारे बसे गांवों में कटान की समस्या काफी हद तक नियंत्रित रही है। सरकार द्वारा कराए गए तटबंध निर्माण और परक्यूपाइन संरचनाओं का असर जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। तटवर्ती ग्रामीणों को वर्षों बाद कुछ राहत महसूस हो रही है।

कटान से जूझते रहे हैं सैकड़ों ग्रामीण
घाघरा कटान भूमि एवं गांव बचाओ समिति के संयुक्त अखिलेश कुमार यादव ने बताया कि बिजलीपुर, पुरुषोत्तम पट्टी, निपानिया समेत आसपास के कई गांव हर साल नदी की मार झेलते थे। बाढ़ के दौरान जब जलस्तर तेजी से बढ़ता, तब कटान भी उतनी ही तेज़ी से होता था। इससे सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन नदी में समा जाती और लोगों को पलायन को मजबूर होना पड़ता।

सरकारी योजनाओं का दिखा असर
ग्रामीणों की लगातार मांग और समिति के प्रयासों के बाद सरकार ने यूट्यूब तटबंध निर्माण के साथ-साथ परक्यूपाइन (जालीदार पत्थरों की संरचना) कार्य शुरू किया। इस बार इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है — कटान की घटनाएं लगभग नगण्य रहीं।

जलस्तर घटा, लेकिन कटान नहीं हुआ
जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 15 जुलाई को नदी का जलस्तर 62.650 सेमी था, जो 21 जुलाई की सुबह तक घटकर 61.690 सेमी रह गया। यानी महज 136 घंटे में जलस्तर में 1.040 सेमी की कमी आई। ग्रामीणों के अनुसार, आमतौर पर जलस्तर घटने पर कटान बढ़ जाता है, लेकिन इस बार हालात नियंत्रण में रहे।

ग्रामीणों ने जताया संतोष
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय से हुए सरकारी कार्यों ने इस बार उन्हें राहत पहुंचाई है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में कटान की समस्या को पूरी तरह रोका जा सकता है।

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